विहारिणि सर्वोपरि शिरताज

Nikunj Keli Madhuri — श्री अली माधुरी

Verse 25 of 34

जय राधा जय राधा राधा जय श्रीराधा। गौर अंगमें झलमलात छवि, नख सिख सुंदर रूप अगाधा। सुन्दर श्याम मनोहर प्यारे, निरखत नयनन सुखसाधा॥ [1] मनमौहन की मोहनी राधे, विछुरत नहीं पल छिन आधा। अलि माधुरी श्यामा जू की, चरन शरन रहे नहिं बाधा॥ [2] - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुञ्ज केली माधुरी, श्यामा जू की विनय पत्रिका जय राधा, जय राधा, जय श्री राधा। नेत्रों में छवि सुन्दर, नख सुन्दर और रूप गम्भीर है। सुंदर, सांवली, मनमोहक, मनमोहक, सुंदर आंखों वाली। [1] मन की स्वामिनी राधे, एक क्षण भी नहीं चूकती। अली मधुरी श्यामा जू की, चरण शरण रहे नहीं बढ़ा.. [2] - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केली माधुरी, श्यामा जू की विनय पत्रिका
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