विहारिणि सर्वोपरि शिरताज
Nikunj Keli Madhuri — श्री अली माधुरी
Verse 26 of 34
मोहि श्यामा प्यारी कब अपनावौगी॥ [1]
तुव पद आस भरोस एक कब हिया सिरावौगी।
अदुभुत रूप अनूप तिहारो मम नयन बसावौगी॥ [2]
सुंदर तुव गुन गान केलि रस श्रवन सुनावौगी।
कर पद सिर सब अंग आपकी सेवा करावौगी॥ [3]
गौर श्याम तब अंग अंग छवि मन मधुप रमावौगी।
अलि माधुरी की अर्ज़ी यह सुन हरखावौगी॥ [4]
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुञ्ज केली माधुरी, श्यामा जू की विनय पत्रिका (3)
प्यारी श्यामा प्यारी तुम्हें कब अपनायेगी? [1] तुम मेरी इस बात पर कब विश्वास करोगे? अद्भुत रूप अनुप तिहारो, मम नयन बसावौगी..[2] सुंदर तुव गुन गुन केलि रस श्रवण सुनवुगी। कर पद सर, अंग-अंग से आपकी सेवा करुंगा.. [3] गौर श्याम तब अंग-अंग छवि मन मधुप रामावौगी। अली माधुरी की अरज़ई सुनना मुश्किल होगा.. [4] - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केली माधुरी, श्यामा जू की विनय पत्रिका (3)