भुजा परस्पर अंश दे

Nikunj Keli Madhuri — श्री अली माधुरी

Verse 5 of 34

एक बार जो लेय, राधा आधा नाम को। रीझी अपनपौ देय, ताको मोहन साँवरो॥ - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्रीनिकुञ्ज प्रकाश अष्टयाम मानसी सेवा (40) एक बार लेने पर आधा नाम राधा का लें. रीझी अपनपौ दे, ताको मोहन संवारो.. - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केली माधुरी, श्री निकुन्याज प्रकाश अष्टयाम मानसी सेवा (40)
भुजा परस्पर अंश देमेरी सरबस जीवन प्यारी