मेरी सरबस जीवन प्यारी
Nikunj Keli Madhuri — श्री अली माधुरी
Verse 6 of 34
(राग भैरवी)
जय जय विपन विहारनि रानी।
जिनकी दया दृष्टि पल माहों कर्म भर्म सब खोय निसानी॥ [1]
तब पद महिमा सुनी अलौकिक तोरी लोकवेद कुलकानी।
रसिक विहारी की जीवन धन वारि पिवै नित पानी॥ [2]
तनमन परम पुष्ट पनपावै सरबस रसिकन की सुखदानी।
अली माधुरी प्रेम रस बाढ़ै श्यामा चरन सरन में जानी॥ [3]
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, मंगल (11)
(राग भैरवी) जय जय विपन विहारानी रानी। जिनकी दयालुता, दृष्टि कर्म के सभी भ्रमों को हर पल नष्ट कर देती है। [1] फिर अलौकिक तोरी लोकवेद कुलकानि के वचनों की महिमा सुनो। रसिक विहारी के जीवन धन के अनुसार रोजाना पानी पिएं। अली माधुरी प्रेम रुचि बधाई हो श्यामा चरण सरन में जानी.. [3] - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केली माधुरी, मंगल (11)