हमारी बृंदावन रजधानी
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 10 of 108
(राग सारंग, तिताला)
हमारी बृंदावन रजधानी।
निधि बन महाराज ब्रजराज लाड़िलो, श्रीराधा पटरानी॥ [1]
निधि बन सेवा कुंज पुलिन, बंसीवट सुख-दानी।
ब्रजनिधि ब्रजरस सौं मन अटक्यौ, निधि पाई मनमानी॥ [2]
- श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि मुक्तावलि (9)
(राग सारंग, टिटला) हमारी राजधानी बृंदावन। निधि बन महाराज ब्रजराज लाडिलो, श्रीराधा पटरानी.. [1] निधि बन सेवा कुंज पुलिन, बंसीवत सुखा-दानी। ब्रजनिधि ब्रजरस सौं मन अटक्यौ, निधि पै अरमानमानी.. [2] - श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि मुक्तावली (9)