श्यामा चरण कमल की आस
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 11 of 108
व्रजधाम में मिलेंगी, लाड़ली प्यारी तोहे,
वृन्दावन कुंजन में, लोट तो लगाओ जरा। [1]
शुक, पिक करें गान, राधा-राधा रटें नित,
नाम गुण गाय-गाय, आँसू तो बहाओ जरा॥ [2]
सेवाकुञ्ज कुञ्जन, निकुञ्ज प्यारे वंशीवट,
स्वामिनि प्यारी को, ध्यान तो लगाओ जरा। [3]
खेलत गोपाल-लाल, प्राण प्रिया प्रतिपाल,
नित नव वाल-लाल, लाड़ तो लड़ाओ जरा॥ [4]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (12)
तुम मुझे व्रजधाम में मिलोगे प्रिय प्रियतम, वृन्दावन कुंजन में, खूब दर्शन करो। [1] उदास गीत उठाओ, राधा-राधा रतन नित, गुन-गे नाम गाओ, आँसू बहाओ। [2] सेवाकुंज कुंजन, निकुंज प्रिय वंशीवट, प्रिय स्वामिनी ध्यान दो। [2]