श्यामा चरण कमल की आस

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 100 of 108

वृन्दावन छाँड़ि कहूँ सुख नाहीं। सुन्दर यमुना प्रीतम प्यारी, प्यारी कदमन छाँहीं॥ वंशीवट सेबाकुञ्ज प्यारो, प्यारी चरण दवाँहीं। चाल गयन्दिनि कुञ्जन विचरें, दिये युगल गलबाँहीं॥ वेणी गूँथे प्रीतम प्यारी, तन की सुध-बुध नाहीं। निशिदिन अबतो श्रीगोपालहित, प्यारी के गुण गाईं॥ - हित गोपाल दास और कहीं कोई सुख नहीं है। मनमोहक यमुना, सुन्दरयुगल सरकार, श्री प्रियतम-प्यारी (राधा-कृष्ण) तथा कदम्ब आदि की छटा अत्यन्त मनोरम है। वंशीवट के तट पर, सेवा कुंज में, प्रियतम श्रीकृष्ण प्रेमपूर्वक श्रीराधा के चरण दबाते हैं। गजगामिनी का मतवाला युगल वृन्दावन के उपवनों में प्रेम करता फिरता है। श्री कृष्ण श्री राधा के बाल गूंथते हैं और प्रेम में इतने खो जाते हैं कि उन्हें अपने शरीर और मन की सुधि ही नहीं रहती। अब तो श्री हित गोपाल दास दिन-रात अपनी प्रिया (श्री राधा) की लीलाओं में लीन रहते हैं, उनका गुणगान करते हैं। - हित गोपाल दास
राधेजू मेरौ जनम सुधारौ।कीवे कहा पढ़वे को कहा फल