कीवे कहा पढ़वे को कहा फल

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 101 of 108

वृन्दावन विपिन सघन बंशीवट पुलिन रमन निधि,वन कोकिला वन मोहन मन भावैं। सेवा कुंज सुखको पुंज जहां राजत पिया प्यारी ललितादिक संग लिये उमग उमग गावै ॥ यमुना जल अति गंभीर कदमनकी जहां भीर ललित लता कुसुम भार अपने बरसावै । हंस मोर कोकिला पपीहा जहां शब्द करैं पशु पक्षी दास कान्हर राधा कृष्ण राधा कृष्ण राधा कृष्ण गावै ॥ - अज्ञात
श्यामा चरण कमल की आसकीवे कहा पढ़वे को कहा फल