राधा माधव भैंट भई

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 13 of 108

(राग आसावरी त्रिताल) राधे तेरी सदा-सदा की दासी। दीजे अपने टहल-महल की, अब तो भाव खवासी॥ [1] शुक पिक मोर, पपीहा सबही, राधा नाम उपासी। श्रीगोपालहित लली प्रिया पे, न्यौछावर कमला सी॥ [2] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (18) (राग आसावरी त्रिताल) आपकी नित्य दासी राधे। मेरे तलघर और महल के दीपक, अब तो भर गए भाव मेरे।।[1] शुक पिक मोर, पपीहा सब, नाम राधा उपासी। श्री गोपालहित लाली प्रिया पे, न्यौछावर कमला सी.. [2] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी (18)
श्यामा, सूझत नहीं कछु मोहेसुखकारी सबके सदा