सुखकारी सबके सदा
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 14 of 108
जय राधे जय सब सुख साधा जय जय कमल नैन बस करनी ।
जय स्यामा जय सब सुख धामा जय जय मन मोहन मन हरनी । ।
जय गोरी जय नित्य किसोरी जय जय भागनी भरी सुभामिनी ।
जय नागरि जय सुजस उजागरि जय जय श्रीहरिप्रिया जय स्वामिनी । ।
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सेवा सुख (22)
जय राधे, जय सर्व सुख सदा, जय जय कमल नयन, बस इतना करो। जय श्यामा, जय सब सुख धाम, जय मन मोहन मन हरणी। . जय गोरी जय नित्य किशोरी जय जय भगनी भारी सुभामिनी। जय नागरी, जय सुजस उजागरि, जय श्री हरिप्रिया, जय स्वामिनी। . - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सेवा सुख (22) नित्य किशोरी वामा, सुख के निवास का रूप, उस राधारानी के लिए हमेशा बनी रहती हैं जो अपनी प्यारी माधुरी के साथ अपनी सुंदर कमल आँखों को नियंत्रित करती हैं। श्री राधा-रानी की जय, जो सभी सुखों की सिद्धि का प्रतीक हैं, जो लाल जू की कमल आँखों को नियंत्रित करती हैं। समस्त सुखों के स्वरूप तथा नर मोहन लाल के मन का हरण करने वाले श्री श्यामजू की सदैव जय हो। श्री गौरांगीजू, नित्य किशोरी को सदैव हर प्रकार का सौभाग्य प्राप्त हो।जिस शाश्वत नगरी का सूर्य उज्जवल है, वह सदैव श्री हरिप्रिया सखी की स्वामिनी बनी रहे।