राधे तुमको मेरी लाज

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 16 of 108

(राग कामोद त्रिताल) राधे तुमको मेरी लाज। तुम बिन मेरा कोइ न जग में, करुणामयी सिरताज॥ [1] तेरो नाम रटौं निशिवासर, तेरो ही अब नाज। जीवन प्राणधन नवल श्याम की, बल इक तेरो आज॥ [2] वृन्दावन की रानी राधे, तेरो इक सत राज। श्रीगोपाल हित हरि लाडिली, सदा गरीब निवाज॥ [3] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (29) (राग कामोद त्रिताल) राधे, तू ही मेरा अभिशाप है। करुणा शिरोमणि, तेरे बिना जग में कोई नहीं। [1] आपका नाम रतुन निशिवासर है, अब मैं आपको नमस्कार करता हूं। जीवन ही जीवन है और धन है, नवल श्याम की शक्ति तुम्हारी है.. [2] वृन्दावन की रानी राधे, सच्चा साम्राज्य तुम्हारा है। श्री गोपाल हित हरि लाडिली, सदा गरीब निवाज़.. [3] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी (29)
किशोरी मोहे सोहनी देन सिखावोश्यामा चरण कमल की आस