राधे आन पड़ो तेरे द्वार
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 19 of 108
(राग दुर्गा त्रिताल)
कृपा करो अब नवल नवेली।
सेवाकुंज-निकुंज भवन की, लता फूल बनूं वेली॥ [1]
छकी रहौं रस माती नित ही, छोड़ो नांही अकेली।
श्रीगोपालहित हरि स्वामिनी, जैसे फूल चमेली॥ [2]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (34)
(राग दुर्गा त्रिताला) कृपा करो अब नवल नवेली। सेवाकुंज-निकुंज भवन का शिलान्यास हो चुका है। [1] मैं हर दिन खुश रहूं, छोटे को अकेला छोड़ दूं। श्री गोपालहित हरि स्वामिनी, चमेली से भरे फूल की तरह.. [2] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी (34)