जपौ मन राधा राधा नाम
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 20 of 108
(राग कल्याण त्रिताल)
जपौ मन राधा राधा नाम।
जीवन अब तो वृथा जात है, करलो ये इक काम॥ [1]
राघा नाम जपत हैं जो जन, संग रहे घनश्याम।
सखियन नाम ये प्राण भावतो, सुखदायक अभिराम॥ [2]
दर-दर-दर भटको जिन प्यारे, बस वृन्दावन धाम।
श्रीगोपालहित नाम प्राणधन, सुन्दर सुखद ललाम॥ [3]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (36)
(राग कल्याण त्रिताला) जपौ मन राधा राधा नाम। अब जीवन हो रहा है निरर्थक, कर लो ये एक काम.. [1] जो जपते हैं नाम रघ, वो ही रहते हैं घनश्याम। दोस्तों इस जिंदगी का नाम है शांतिमय खुशी। [2] दर-दर भटको प्रिये, अंततः मिल ही जायेगा वृन्दावन धाम। श्री गोपालहित नाम प्रधान, सुंदर सुखद ललाम.. [3] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी (36)