श्यामा चरण कमल की आस
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 21 of 108
कालिन्दी पै घूम घूम प्रिया चरण चूंम चूंम,
श्रीवृन्दावन वास कर, जीवन सुधार ले। [1]
भजले श्री राधा राधा, तेरी कट जाये बाधा,
सेवाकुञ्ज कुञ्जन कूँ पलकन बुहार ले॥ [2]
प्यारे दोऊ रास करें, हास परिहास करें,
लता वेलि निरख निरख, नैनन चिक डार ले। [3]
हरि गोपाल हित, प्यारी जहाँ आवे नित,
वृन्दावन दिव्य छवि, हिये में तू धार ले॥ [4]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (40)
कालिंदी पै घन घन घन प्रिय चरण चन चन श्री वृन्दावन में निवास करो और अपना जीवन सुधारो। [1] भजले श्री राधा राधा तेरे विघ्न कटे, सेवाकुंज कुंजन कुण पलकां ले बुहार ले.. [2] प्रिय युगल हंसी ठिठोली, लता वेलि निरख निरख, नैनन चिक डार ले। [3] हरि गोपाल हित, प्यारी जहाँ आवे नित, वृन्दावन दिव्य छवि, हे मन, तू पकड़ इसे.. [4] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी (40)