(दोहा)
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 23 of 108
(दोहा)
कृष्ण वल्लभा लाड़िली, राधा वल्लभ लाल।
बसहु निरन्तर हीय में, आनन्द रूप रसाल॥
(पद)
जीवनि धन राधा वल्लभ लाल।
कृष्ण वल्लभा रसिकिनि राधा, वारिज बदनी बाल॥
जुगल किसोर किसोरी जोरी गोरी स्याम तमाल।
बसहु निरन्तर हियें श्रीहरिप्रिया आनन्द रूप रसाल॥
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावानी, सेवा सुख (44)
सखियाँ कहने लगीं
(दोहा)
हम यही प्रार्थना करती हैं कि श्रीकृष्ण की प्रियतमा ये श्रीलाड़िलीजी और श्रीराधा के प्राणवल्लभ ये लालजू, जो आनन्द, सौन्दर्य और रस के साक्षात् स्वरूप हैं, हमारे हृदयों में सदैव वास करें।
(पद)
हमारे जीवन धन स्वरूप यह राधा वल्लभ लाल, और कृष्ण वल्लभा रसिकिनि कमल मुखी बाल श्रीराधा हैं। जुगल किशोर किशोरी की यह जोरी जो सदा गौर श्याम स्वरूपों से तमाल कञ्चन लता की तरह रहते हैं सदा हमारे हृदयों में निवास करें। श्रीहरि एवं प्रिया दोनों के विग्रह, आनन्द, रूप तथा रस ही के गठित हैं।