राधे कौन भयो अपराध हमारो
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 24 of 108
(राग झंझोटी, त्रिताल)
राधे कौन भयो अपराध हमारो।
श्री वृन्दावन वास छुड़ायो, जो है प्राणन प्यारो॥ [1]
वेगि बुलाओ मोहि स्वामिनी, अवगुन उर न धारो।
प्राणन-प्यारी हित गोपाल की, अब तो तोहे पुकारो॥ [2]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (49)
(राग झंझोटी, त्रिताला) कौन बन गया हमारा अपराध, राधे? श्री वृन्दावन, मुझे मेरे जीवन से मुक्त करो, मेरे प्रिय.. [1] मुझे बुलाओ, हे मेरे प्रिय, मुझे किसी भी अवगुण में मत डालो। मेरे प्रिय हित गोपाल, अब तुम मुझे बुलाओ.. [2] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंजी धारक], निकुंज रस वल्लरी (49)