राधा-राधा जप तू मना रे
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 40 of 108
(राग परज, त्रिताल)
राधा-राधा जप तू मना रे।
नाम सुधा लीला दरसावे, राख भरोस प्रिया चरणा रे॥ [1]
रसिक रास-रस मिलि हैं तोहे, जो हो जा नाम शरणा रे।
हितगोपाल श्रीप्रिया शरण हो, वृन्दावन रस मन लगना रे॥ [2]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (86)
(राग परज, त्रिताल) जपो राधा-राधा, तू मन रे। नाम सुधा लीला दरसवे, भरोसा रखो प्रिय चरण.. [1] रस तो मिल गया, कुछ भी हो, नाम का आश्रय लो। हित गोपाल श्रीप्रिया शरण हो, वृन्दावन रस मन लगाना रे.. [2] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी (86)