श्यामा चरण कमल की आस
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 42 of 108
(कवित्त)
आज सखी सेवाकुंज कुंजन ते आवत जू,
प्राण प्यारी प्रीतम के, संग सुखदाई जू। [1]
मधुर-मधुर करें बात, मंद मुस्काय जात,
रस सरसाय आत, प्रीती मन भाई जू॥ [2]
ऐसी अलबेली प्यारी, श्यामा सुखधामा न्यारी,
कौन भाग सखी आज, नैनन लखाई जू। [3]
श्रीगोपालहित, हर लियो चित्त-वित्त,
शरण! छोड़ि जाऊँ कित, कृपा बरसाई जू॥ [4]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (96)
(कविता) आज मेरे जीवन में मेरे मित्र सेवाकुंज कुंजन आए हैं, मेरे प्रिय प्रियतम, मैं तुमसे खुश हूं। [1] मधुरा-मधुर करे बात, मंद मुस्कय जात, रस सरसय अत, प्रीति मन भाई जू.. [2] ऐसी अल्हड़ प्यारी, श्यामा सुखदम् न्यारे, कौन भाग सखी आज, नैन लचाई जू। [3] श्री गोपालहित, हर लियो चित्त-वित्त, शरण! जौ किट छोड़ो, कृपा बरसाओ.. [4] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी (96)