राधा नाम जपौ दिन रैना
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 43 of 108
(राग मालकोश, त्रिताल)
हमारी प्रिया छबीली राधा।
जाकी छवि सुमिरत अरु निरखत, दूर होय सब बाधा॥ [1]
वनरानी सुंदर अति प्यारी, ब्रज रसिकन सब साधा।
श्रीगोपालहित हरी स्वामिनी, महिमा अमित अगाधा॥ [2]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (99)
(राग मालाकोश, त्रिताल) हमारी प्यारी सुंदर राधा। उनकी छवि पवित्र और निर्दोष है, सब कुछ दूर है। [1] वन रानी सुन्दर अति मनमोहक है, ब्रज सदा सबको प्रिय है। श्री गोपालहित हरि स्वामिनी, महिमा अमित अगधा.. [2] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी (99)