नवल प्रिया कृपालू ऐसी

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 44 of 108

(राग खमाज, त्रिताल) नवल प्रिया कृपालू ऐसी। कैसेहुँ चरण शरण में आवें, बाधा मिट जाय जैसी॥ [1] प्रिया स्वभाव मृदुलता नीकी, संग सहचरी वैसी। श्रीगोपालहित लली प्रिया पै, वारौं उमा कमलासी॥ [2] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (103) (राग खमाज, त्रिताला) नवल प्रिय कृपालु ऐसी। मैं उनके चरणों की शरण कैसे ले सकता हूँ, कृपा तो विजय के समान है। [1] प्रिया का स्वभाव सौम्य है, संगति भी वैसी ही है। श्री गोपालहित लाली प्रिया पै, वरौं उमा कमलासी.. [2] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी (103)
राधा नाम जपौ दिन रैनाप्यारी कृपा लाल उर जानी