हमारी सर्वस राधारानी

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 50 of 108

(राग भीमपलासी, त्रिताल) हमारी सर्वस राधारानी। जिनकी कृपा सों ही पायी वृंदावन रजधानी॥ [1] मो निर्धन को धन श्रीश्यामा, सेवाकुंज महारानी। श्रीगोपाल हित नवल प्रिया ने, विनती सुनी हम जानी॥ [2] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (119) (राग भीमपलासी, त्रिताल) हमारी सर्वोच्च राधारानी। जिनकी कृपा से पुत्र वृन्दावन की राजधानी बना। [1] गरीबों को धन दिया, श्रीश्यामा, सेवाकुंज महारानी। श्री गोपाल हित नवल प्रिया ने, वन्ति सुनि हम जानी.. [2] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी (119)
सखी हों राधा चरण उपासीअब हम राधे चरण अली