श्रीराधा कृपा पै बलि जईये

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 52 of 108

(राग मुल्तानी, त्रिताल) श्रीराधा कृपा पै बलि जईये। श्रीवृन्दावन जाय के, राधा-राधा कहिये॥ [1] नित-नित डोलो श्रीयमुना तट, नैनन नीर बहइये। सर्वस श्रीगोपाल लाड़ली, जैसे राखे रहिये॥ [2] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (125) (राग मुल्तानी, त्रिताल) श्री राधा की कृपा से त्याग। जय श्री वृन्दावन, बोलो राधा-राधा.. [1] नीता-नित दोलो श्रीयमुना तत, नैनन नीर बहाई। सर्व श्री गोपाल लाडली, ऐसे ही रखो.. [2] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी (125)
अब हम राधे चरण अलीश्यामा चरण कमल की आस