श्यामा चरण कमल की आस
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 53 of 108
भानुनन्दनी सदा वन्दनी चन्द चन्दनी,
अब तो प्रिया हमारी हैं। [1]
प्रिय फन्दिनी गज गयन्दिनी सुखद रंजनी,
जीवन की रखवारी हैं॥ [2]
व्रज ठकुरानी श्रीवनरानी नव गुण खानी,
रसिकन हिये विचारी हैं। [3]
हित की बानी पिय मनमानी शोभा सनमानी,
हितगोपाल बलिहारी हैं॥ [4]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (129)
भानुनन्दनी चांदनी को सदा भजती, अब तो वह हमारी प्यारी है। [1] प्रिया फंदिनी गज गयंदिनी सुखद रंजनी जीवन की रक्षक हैं। [2] व्रज ठकुरानी श्रीवनरानि नव गुन खानि, रसिकन हिये विचारी। [3] हित की बानी पिया मनमानी शोभा सनमानी, हितगोपाल बलिहारी है.. [4] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी (129)