राधे तुमको मेरी लाज

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 54 of 108

(राग कामोद, त्रिताल) अब तो भई राधा चरण गुलाम। सदा बिकी अब इन चरनन में, दासी हूँ बेदाम॥ [1] वृन्दावन में निशिदिन डोलूँ, जप्यौ करूँ श्रीराधा नाम। तुम ही गति हो तुम ही मति हो, तुमसों नातो तुम सों काम॥ [2] तुम्ही इक अवलम्ब लाड़ली, सुख सिन्धू अभिराम। श्रीगोपालहित हरी स्वामिनी, अब तो लेना थाम॥ [3] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (130) (राग कामोद, त्रिताल) अब भाई राधाचरण गुलाम। अब ये मर्द हमेशा के लिए बिक गए, लड़कियाँ बेजान हो गईं। [1] वृन्दावन पुरुष निशिदिन दोलुं, जप्यौ करुं श्रीराधा नाम। गति भी तुम, विचार भी तुम, न तुम, पुत्र से भी कम तुम.. [2] तुम सहारा बालिका, सुख ही सुख पाप। श्री गोपालहित हरि स्वामिनी, अब सम्हालो.. [3] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी (130)
श्यामा चरण कमल की आसराधा नाम सों चित रांच