कालीदह कूल कुंजके माहीं

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 56 of 108

(राग जैजैवंती) मेरे मनहिं हुलास स्वामिनी, श्रीवन सुरख लहोंगी। [1] कोर कटाक्ष विहारिनि तेरे, निधुवन कोन गहोंगी॥ [2] कवहुँक सेवाकुंज कदमतर, राधा नाम कहोंगी। [3] फिरिफिरि श्रीवन ललितकिशोरी, अलि अरविंद रहोंगी॥ [4] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (282) (राग जैजैवंती) मेरी प्रियतमा, मेरा रंग सुन्दर होगा। [1]. [3] श्रीवन ललित किशोरी, अली अरविन्द होंगे.. [4] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (282)
राधा नाम सों चित रांचश्यामा चरण कमल की आस