मन श्री राधा-राधा कहि रे
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 63 of 108
(राग आसावरी, तीन ताल)
धन-धन प्यारौ राधा नाम।
आठों याम हृदय धरि देखो,
उर आवे घनश्याम॥ [1]
जाकि महिमा पै सब वारौं,
कोटि रमा रतिकाम।
श्री राधा गोपाल हरि हित,
निज नयना अभिराम॥ [2]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (75)
(राग आसावरी, तीन ताल) धन-धन प्यारु राधा नाम। यम के हृदय वाले को देखो, उर आवे घनश्याम... [1] जाकी महिमा में सब वर, कोटि राम रतिकाम। श्री राधा गोपाल हरि हित, निज नयना अभिराम.. [2] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी (75)