कीवे कहा पढ़वे को कहा फल
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 65 of 108
दूल्हा राधावल्लभ, दुल्हन राधा गोरी । नैनों में बसा लो, अद्भुत यह जोड़ी ।
सेवा कुंज में श्रृंगार, राधा कुंड में जल विहार, दानघाटी में करत युगल, मीठी मीठी बात ।।
निधिवन की क्या बात, मदन टेर पर मुस्कात, वृंदावन त्रिभुवन धनी को, है निज निवास ।।
वृंदावन के राजा, श्याम-राधिका रानी । निज जन हेतु रचत, नित नूतन कहानी ।।
- अज्ञात