कीवे कहा पढ़वे को कहा फल
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 67 of 108
एक रज रेणुका पै चिंतामणि वारि डारों वारि डारों विश्व सेवा कुंजके विहार पै ॥
लतनके पतन पै कोटि कल्प वारिडारों रंभाहूको वारि डारो गोपिनके द्वारपै ॥
ब्रजकी पनिहारन पै शची रची वारि डारों बैकुण्ठहू को वारि डारों कालिंदीकी धार पै ।
कहै अभयराम एक राधा जूको जानतहों देवनको वारि डारो नन्द के कुमार पै ॥
- अज्ञात