छबीली बिहारिनि की छबि पर बलिहारी

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 68 of 108

हमारी बृंदावन रजधानी। निधि बन महाराज ब्रजराज लाड़िलो, श्रीराधा पटरानी॥ निधि बन सेवा कुंज पुलिन, बंसीवट सुख-दानी। ब्रजनिधि ब्रजरस सौं मन अटक्यौ, निधि पाई मनमानी॥ - बृजनिधि श्री वृन्दावन सभी तीर्थों का मुकुट है, रसिकों की राजधानी है, जहाँ निधिवन के अधिपति, ब्रजराज, प्रिय श्रीकृष्ण नित्य निवास करते हैं और श्री राधा रानी उनकी सबसे प्रिय रानी के रूप में निवास करती हैं। वृन्दावन में स्थित निधिवन, सेवाकुंज, यमुना पुलिन, वंशीवट आदि मनोरंजन के स्थान हैं जो प्राणियों को अद्भुत सुख प्रदान करते हैं। श्रीब्रजनिधि जी कहते हैं, मेरा मन उन ब्रजरस में अटका हुआ है, जिनसे मैंने अभीष्ट मनोवांछित धन प्राप्त किया है। - बृजनिधि
कीवे कहा पढ़वे को कहा फलहे री ! मोहि लागत वृन्दावन प्यारो।