श्यामा चरण कमल की आस

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 83 of 108

मेरे गुरु मात पिता, लाड़ली किशोरी एक, इन्हीं को बल राखों निशि-दिन मन में। [1] इन्ही की दासी सुखरासी सुख चाहूँ सदा, प्यारी छवि देखों कभी यमुना पुलिन में॥ [2] नित उठ चाव सों निहारूँ बाट प्यारी जू की, छवि देख-देख जीऊँ नैनन की सैनन में। [3] लाड़ली जू एक बार हार बार चार-चार, चूड़ी पहिराऊँ नित, प्यारी सखी जन में॥ [4] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (47) मेरे शिक्षक, पिता, प्रिय लड़की मत बनो, उन्हें पूरे दिन, हर दिन अपने दिमाग में मजबूत रखो। [1] मैं सदैव उसकी दासी सुखरासी के सुख की कामना करता हूं, कभी-कभी मुझे यमुना पुल पर उसकी सुंदर छवि दिखाई देती है.. [2] मैं प्रतिदिन छाया के नीचे उठकर उस प्यारी चीज को देखता हूं, मुझे उसकी छवि दिखाई देती है और वह मेरी आंखों में बस जाती है। [3] लाड़ली जू एक बार हर बार चरा-चार, हर दिन चुदाई फिरौन, प्यारी सखी जन में.. [4] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी (47)
मन मोहन मन मोहनी, सहज ही स्यामल गौर।हमरी बात भली बनी भई लडैती प्रान