हमरी बात भली बनी भई लडैती प्रान

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 84 of 108

राधेजू मेरौ जनम सुधारौ। अब मोंहि वृन्दावन में डारौ॥ - श्री गोविन्दशरण देवाचार्य राधेजू मेरा जन्म सुधारो। अब वृन्दावन में साधुओं को डर लगता है.. - श्री गोविंदशरण देवाचार्य
श्यामा चरण कमल की आसमोहि वास सदा वृन्दावन कौं, नित उठ यमुना पुलिन नहाऊँ। [1]