शरण श्री वृंदावन की जइये

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 90 of 108

(राग गौड सारंग) शरण श्री वृंदावन की जइये। युगल बिहारी चरण कमल सों, निश दिन नेह लगइये॥ [1] सेवा कुंज समीप बैठके, दम्पति ध्यान समइये। होय भावना सिद्ध सहज ही, निरखि नयन हुलसइये॥ [2] लेले सीत रसिक संतन की, बाधा भूख भगइये। शीतल सुंदर जल यमुनाको, पी पी प्यास मिटइये॥ [3] राधे श्याम नाम रट रसना, आँसू दृगन बहइये। सरसमाधुरी पिय प्यारी के, प्रेम पुलक गुण गइये॥ [4] - श्री सरस माधुरी (राग गौड़ सारंग) श्री वृन्दावन की जय। दम्पति को प्रतिदिन अपने चरण कमलों पर जल लगाना चाहिए। [1] दम्पति को सेवा कुंज के पास बैठकर ध्यान करना चाहिए। हाँ, भावनाएँ आसानी से पूरी हो जाती हैं, अंधी आँखों में रोशनी आ जाती है। [2] प्यारे बच्चे के पास बैठने से भूख बढ़ती है। यमुना का शीतल, सुन्दर जल पीकर अपनी प्यास बुझाओ.. [3] ले लो नाम राधे श्याम का, बहा दो आँसू। सरसमाधुरी पिया प्यारी के, प्रेम पुलक गुन गाये.. [4] - श्री सरस माधुरी
प्रिया पिय छबि लखि छकनि छकाईश्री पौर्णमासी पूरी तरह से श्री राधा कृष्ण के लिए भोग की सबसे उत्तम व्