प्रिया पिय छबि लखि छकनि छकाई

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 89 of 108

शरण श्री वृंदावन की जइये । युगल बिहारी चरण कमल सों, निश दिन नेह लगइये ॥ सेवा कुंज समीप बैठके, दम्पति ध्यान समइये । होय भावना सिद्ध सहज ही, निरखि नयन हुलसइये ॥ लेले सीत रसिक संतन की, बाधा भूख भगइये । शीतल सुंदर जल यमुनाको, पी पी प्यास मिटइये ॥ राधे श्याम नाम रट रसना, आँसू दृगन बहइये । सरसमाधुरी पिय प्यारी के, प्रेम पुलक गुण गइये ॥ - सरसमाधुरी श्री वृन्दावन की शरण लो। युगल बिहारी (श्री राधा-कृष्ण) के चरण कमलों में दिन-रात प्रेम करो। सेवा कुंज के पास बैठकर श्री युगल सरकार का ध्यान करें, जहां भावना आसानी से सिद्ध हो जाती है। उन्हें आंखों से देखकर मन प्रफुल्लित हो जाता है। रसिक संतों की शिक्षा प्राप्त करके अपनी भूख की बाधा को शांत करो और श्री यमुनाजी के शीतल, सुंदर जल को पीकर अपनी प्यास बुझाओ। मुख से नाम ले कर राधे-श्याम, नेत्रों से प्रेम के आँसू बहाओ। श्री सरस माधुरी का कहना है कि युगल को प्रेम में डूब जाना चाहिए और आनंदपूर्वक उनका गुणगान करना चाहिए। - सरसमाधुरी
सेवाकुंज सो कुँज निज, सम्पति दम्पति सेव।शरण श्री वृंदावन की जइये