कीच लगी ब्रज खिरक की
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 93 of 108
श्रीवनराज विलासिनी, मृदुहासिनी सुख पुँज।
श्रीकृष्णवल्लभा राधिके, जय जय सेवाकुँज॥
- ब्रज के दोहे
श्रीवनराज विलासिनी, मृदुहासिनी सुख पुंज। श्रीकृष्णवल्लभ राधिके, जय जय सेवाकुंज.. - braj ke dohe