अंगे तु वामे वृषभानुजां मुदा

Nimbarka Stotras — जगद्गुरु श्री निम्बार्काचार्य

Verse 1 of 7

अंगे तु वामे वृषभानुजां मुदा, विराजमानामनुरूप-सौभगाम्। सखीसहस्रै: परिसेवितां सदा, स्मरेम देवीं सकलेष्टकामदाम्॥ - जगद्गुरु श्री निम्बार्काचार्य, श्री वेदांत दश्श्लोकी (5) अंगे तु वामे वृषभानुजन मुदा, विराजमानमनरूप-सौभागम्। सखिसाश्रयः परिसेवितं सदा, स्मरण करो देवी सकलेष्टकदम। - जगद्गुरु श्री निम्बार्काचार्य, श्री वेदांत दशश्लोकी (5)
अंगे तु वामे वृषभानुजां मुदा