अंगे तु वामे वृषभानुजां मुदा

Nimbarka Stotras — जगद्गुरु श्री निम्बार्काचार्य

Verse 4 of 7

उपासनीयं नितरां जनै: सदा, प्रहाणयेअज्ञानतमोअनुवृत्ते:। सनन्दनाद्योर्मुनिभिस्तथोक्तं, श्रीनारदायाखिलतत्वसाक्षिणे॥ - जगद्गुरु श्री निम्बार्काचार्य, श्री वेदांत दश्श्लोकी (6) उपासनायं नित्रं जनै: सदा, प्राणयज्ञन्तमो अनुवृत्ते:। सनन्दद्योर्मुनिभिस्तथोक्तन, श्रीनारद्याखिलत्वसाक्षिणे। - जगद्गुरु श्री निम्बार्काचार्य, श्री वेदांत दशश्लोकी (6)
अंगे तु वामे वृषभानुजां मुदाप्रातर्नमामि वृषभानुसुतापदाब्जं