भजौ मन राधे महारानी
Padavali —
Verse 3 of 9
(राग अड़ानो)
भजौ मन राधे महारानी।
जिनके रस-जस गावत प्रमुदित, मनमोहन सब सुखदानी॥ [1]
करत सिंगारनि धनि-धनि मानत, छबि निरखत आनँददानी।
राधाबल्लभ 'हित परमानंद', प्रीति परस्पर हम जानी॥ [2]
- श्री हित परमानंद दास जी, श्री हित परमानंद दास जी की वाणी, पदावली (79)
(राग अदानो) भजौ मन राधे महारानी। जिसका रस और गति सुखदायक है, जिसका प्रेम और स्नेह सर्व सुखदायक है। [1] करत सिंगरानी को धनी और धनवान माना जाता है, छवि निरखत आनंद दानी। राधावल्लभ 'हित परमानंद', हम आपस में प्रेम जानते हैं.. [2] - श्री हित परमानंद दास जी, श्री हित परमानंद दास जी की वाणी एवं वचन (79)