किशोरी मैं तो भली बुरी सो तेरी
Padavali —
Verse 8 of 9
(राग-काफी)
सुनियें अरज हमारी, श्रीवृषभानु कुमारि।
दरसन देहु दया करिकें मोहि, प्रीतम-प्रान-अधार॥ [1]
कुंज महल निजुसजनी के सँग, टहल करौं सुकुमारि।
राधाबल्लभ 'हित परमानंद', आइ मिली रिझवारि॥ [2]
- श्री हित परमानंद दास जी, श्री हित परमानंद दास जी की वाणी, पदावली (87)
(राग-काफी) विनती हमारी सुनो श्री वृषभानु कुमारी। दरसन देहु दया करिकेन मोहि, प्रीतम-प्राण-अधार।।[1] निजुषाजनी सहित कुंज महल, आइये सुकुमारी के दर्शन करें। राधावल्लभ 'हित परमानंद', ऐ मिलि रिजर्वि... [2] - श्री हित परमानंद दास जी, श्री हित परमानंद दास जी की वाणी एवं वचन (87)