आज बने सखि नंदकुमार

Paramanand Sagar — श्री परमानन्द दास

Verse 1 of 33

(राग कान्हरौ व यमन) आज बने सखि नंदकुमार। वाम भाग वृषभान नंदिनी ललितादिक गावे सिंहद्वार॥ [1] कंचन थार लियेजु कमल कर मुक्ता फल फूलन के हार। रोरी को सिर तिलक विराजत करत आरती हरस अपार॥ [2] यह जोरी अविचल श्रीवृन्दावन असीस देत सकल व्रजनार। कुँजमहल में राजत दोऊ परमानन्द दास बलिहार॥ [3] - श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर (795) (राग कान्हरौ वि यमन) अज बने सखी नंदकुमार। नंदिनी ललितादिका ने वृषभ के बाईं ओर सिंह द्वार दिया। आरती हरस अपार रोरी के माथे पर तिलक दे रही है.. [2] या जोरी सकल व्रजनार को अखंड श्रीवृंदावन का आशीर्वाद दे रही है। कुंजमहल में रजत युगल परमानंद दास बलिहार.. [3] - श्री परमानंद दास, परमानंद सागर (795)
बाँह डुलावति आवति राधा