परमानंद सागर

Paramanand Sagar

श्री परमानन्द दास · 33 verses · Braj

  1. 1. आज बने सखि नंदकुमार
  2. 2. बाँह डुलावति आवति राधा
  3. 3. आरती युगल किशोर की
  4. 4. बाँह डुलावति आवति राधा
  5. 5. बाँह डुलावति आवति राधा
  6. 6. बाँह डुलावति आवति राधा
  7. 7. आनंद सिंधु बढ्यौ हरि तन में
  8. 8. बाँह डुलावति आवति राधा
  9. 9. बाँह डुलावति आवति राधा
  10. 10. बाँह डुलावति आवति राधा
  11. 11. ब्रज में होत कुलाहल भारी
  12. 12. चलि राधा! तोकौं स्याम बुलावै
  13. 13. धन धन राधिका के चरन
  14. 14. मेरौ मन बाबरौ भयौ
  15. 15. बाँह डुलावति आवति राधा
  16. 16. मेरौ मन बाबरौ भयौ
  17. 17. कौन रसिक है इन बातनि कौ
  18. 18. चलि राधा! तोकौं स्याम बुलावै
  19. 19. लगै जो श्रीवृन्दावन कौ रंग
  20. 20. मेरौ मन बाबरौ भयौ
  21. 21. पान मुख बीरी राची
  22. 22. बाँह डुलावति आवति राधा
  23. 23. प्रीति तौ एकहिं ठौर भली
  24. 24. प्रीति तो नंदनंदन सों कीजै
  25. 25. बाँह डुलावति आवति राधा
  26. 26. चलि राधा! तोकौं स्याम बुलावै
  27. 27. बाँह डुलावति आवति राधा
  28. 28. मेरौ मन बाबरौ भयौ
  29. 29. बाँह डुलावति आवति राधा
  30. 30. आनंद सिंधु बढ्यौ हरि तन में
  31. 31. वृंदावन क्यों न भये हम मोर
  32. 32. आज बने सखि नंदकुमार
  33. 33. सखी मेरो आगम को दिन आयो