बाँह डुलावति आवति राधा
Paramanand Sagar — श्री परमानन्द दास
Verse 2 of 33
आज दिवारी मंगल चार।
ब्रज जुवतिजन मंगल गावत, चौक पुरावत नंद कुमार॥ [1]
मधु मेवा पकवान मिठाई भरि भरि लीने कंचन थार।
परमानंददास को ठाकुर पहिरे आभूषन सिंगार॥ [2]
- श्री परमानन्द दास जी, परमानंद सागर
ए जे दिवारी मंगल। 4.ब्रज जुवतिज्न मंगल गावत, चौक पुरावत नन्द कुमार।।[1] मधु मेवा पकवान मधुर भरी भारी रेखा कंचन थार। ठाकुर ने परमानंद दास को आभूषणों से सजाया.. [2] - श्री परमानंद दास जी, परमानंद सागर