बाँह डुलावति आवति राधा

Paramanand Sagar — श्री परमानन्द दास

Verse 22 of 33

(राग सारंग) प्रगट्यो सब व्रज को सिंगार। कीरती कूख अवतरी कन्या सुन्दरता को सार॥ नखसिक रूप कहाँ लों बरनो कोटिक मन बलिहार। परमानन्द वृषभानु नन्दनी जोरी नंददुलार॥ - श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर (49) (राग सारंगा) प्रगट्यो सब व्रज को सिंगार। किराती कुख अवतारी बालिका सौंदर्य का सार है.. नग्न रूप कहाँ से आता है? परमानंद वृषभानु नंदनि जोरि नंददुलार.. - श्री परमानंद दास, परमानंद सागर (49)
पान मुख बीरी राचीप्रीति तौ एकहिं ठौर भली