सखी मेरो आगम को दिन आयो

Paramanand Sagar — श्री परमानन्द दास

Verse 33 of 33

सखी मेरो आगम को दिन आयो। ग्रीष्म तपत गयो मेरी सजनी बदरन छायौ॥ [1] मेरे पिय आये है अबही नेह नीर भर आयौ। परमानन्द स्वामी रतिनायक सुरत हिंडोरे झुलायो॥ [2] - श्री परमानन्द दास, परमानन्द सागर (223) मित्र, मेरे आने का दिन आ गया। गर्मी की तपन चली गई, मेरे प्रिय, तुम चले गए.. [1] मेरा प्यार यहाँ है, अब तुमने मुझे आँसू से भर दिया है। परमानंद स्वामी रतिनायक सुरत हिंडोरे झुलायो.. [2] - श्री परमानंद दास, परमानंद सागर (223)
आज बने सखि नंदकुमार