जय जय राधा-नाम, वृन्दावन जार धाम

Prem Bhakti Chandrika — श्री नरोत्तम दास

Verse 4 of 8

नरोत्तमदासे कय, एइ जेन मोर हये, व्रजपुरे अनुरागे वास। सखीगण-गणनाते, आमारे लिखिवे ताते, तबहि पूरव अभिलाष॥ - श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (57) नरोत्तमदासे कै, एइ जेन मोर हाये, व्रजपुरे अनुरागे वस। सखीगण-गणनाते, अमारे लिखिव तते, तभी पूर्व इच्छा.. - श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (57)
जय जय राधा-नाम, वृन्दावन जार धामजय जय राधा-नाम, वृन्दावन जार धाम