जय जय राधा-नाम, वृन्दावन जार धाम
Prem Bhakti Chandrika — श्री नरोत्तम दास
Verse 5 of 8
पृथक आवास योग, दुखमय विषय भोग, व्रजवास गोविन्द-सेवन।
कृष्णकथा कृष्णनाम, सत्य सत्य रसधाम, व्रजजनेर सङ्ग अनुक्षण॥
- श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (31)
पृथक निवास योग, कष्टकारी विषयों का भोग, व्रजवास गोविंद का सेवन। कृष्णकथा कृष्णम, सत्य सत्य रसधाम, व्रज्जनेर संग अनुक्षण.. - श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (31)