प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं

Prem Vatika — श्री रसखान

Verse 10 of 41

ज्ञान ध्‍यान विद्या मती, मत बिस्‍वास बिवेक। विना प्रेम सब धूर हैं, अग जग एक अनेक॥ - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (25) ज्ञान, ध्यान, बुद्धि, राय, विश्वास और बुद्धि। वीणा प्रेम सब धुर हैं, अग जग एक अनेक.. - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (25)
प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिंप्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं