प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं
Prem Vatika — श्री रसखान
Verse 9 of 41
इक अंगी बिनु कारणहि, इकरस सदा समान।
गनै प्रियहि सर्वस्व जो, सोइ प्रेम प्रमान॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (21)
कुछ भी करने का कोई मतलब नहीं है, एक और एक ही हमेशा एक ही है. गनि प्रियाहि सर्वस्व जो, सोई प्रेम प्रमाण।।- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (21)