प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं
Prem Vatika — श्री रसखान
Verse 11 of 41
ज्ञान करम रु उपासना, सब अहमिति को मूल।
दृढ़ निस्चय नहिं होत बिन, किए प्रेम अनुकूल॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (12)
ज्ञान, कर्म और उपासना ही समस्त महत्ता का मूल है। गहन प्रेम के बिना कोई समाधान नहीं.. - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (12)