प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं

Prem Vatika — श्री रसखान

Verse 12 of 41

हरि के सब आधीन पै, हरी प्रेम-आधीन। याही तें हरि आपुहीं, याही बड़प्‍पन दीन॥ - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (36) हर कोई हरि के वश में है, हरि के प्रेम के अधीन है। याहि तेन हरि आपुहिं, याहि बदप दीन.. - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (36)
प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिंप्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं