प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं
Prem Vatika — श्री रसखान
Verse 13 of 41
जातें पनपत बढत अरु, फूलत फलत महान।
सो सब प्रेमहिं प्रेम यह, कहत रसिक रसखान॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (44)
जतेन पानपत बधात अरु, फुलत फलत महं। तो सब प्रेम ही प्रेम है, कहते हैं रसिक रसखान.. - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (44)